Introduction to IP Address (IP Address क्या
है?) – पूरी जानकारी हिंदी में | Types,
Classes, Versions, Examples
जब भी
आप इंटरनेट पर कोई वेबसाइट खोलते हैं, ईमेल भेजते हैं, वीडियो
देखते हैं या किसी दूसरे कंप्यूटर से डेटा साझा करते हैं, तब आपके डिवाइस की पहचान IP
Address (Internet Protocol Address) के
माध्यम से होती है। IP Address नेटवर्क
में जुड़े प्रत्येक डिवाइस का एक यूनिक (Unique) पता होता है, जिससे डेटा सही स्थान तक पहुँचता है।
यदि IP Address न हो, तो इंटरनेट पर किसी भी डिवाइस की पहचान करना संभव नहीं होगा। इसलिए IP Address को इंटरनेट और कंप्यूटर नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक माना जाता है।
IP Address की परिभाषा (Definition of IP Address)
IP Address एक Number है, जो Internet पर किसी Computer या Device की पहचान करता है। यह एक Address के समान है, जो यह बताता है कि Information कहाँ से Receive हो रही है और इसे कहाँ पर Send करना चाहिए। IP
Address विषिश्ट (Specific)
रूप से Internet Protocol द्वारा Send Data के Source और Destination (गंतव्य) की पहचान करते हैं। IP
Address का Basic
Version अर्पानेट (ARPANET)
द्वारा 1983 में विकसित किया गया था।
सरल शब्दों में:
IP Address कैसे कार्य करता है?
जब आप
अपने ब्राउज़र में किसी वेबसाइट का नाम टाइप करते हैं, तो सबसे पहले DNS (Domain Name System) उस नाम को IP Address में बदलता है।
इसके
बाद:
- आपका कंप्यूटर वेबसाइट के IP Address को खोजता है।
- डेटा पैकेट इंटरनेट के माध्यम से भेजे जाते हैं।
- Router सही IP Address तक डेटा पहुँचाता है।
- वेबसाइट आपके ब्राउज़र में खुल जाती है।
IP Address के प्रकार (Types of IP Address)
वर्तमान में Internet की इस दुनिया में दो IP Address का इस्तेमाल किया जाता है। IP4 और IP6.
IPv4 Version
IPv4 सबसे व्यापक
(Comprehensive) रूप से
Use किया जाने वाला Internet
Protocol है। IPv4
Address को एक String के रूप में लिखा जाता है,
जिसमें 4 भाग होते हैं, जिसकी Range 0 से 255 तक होती है। जिसमें प्रत्येक संख्या को दषमलव (.) से अलग किया जाता है। IPv4
32 Bit Address का उपयोग करता है, जिसमें प्रत्येक भाग 8 Bit का होता है। IPv4 में लगभग
4.3 Billion IP Address हैं। इन Address में से कुछ Address Private Network और Multicasting Address की Category के Under Unique
Use के लिए Reserve रखे गए हैं। यह एक General
IPv4 Address है- 172.16.254.1
IPv4 Address Classes
- Class Address Range
- Class A 1.0.0.0 to 127.255.255.255
- Class B 128.0.0.0 to 191.255.255.255
- Class C 192.0.0.0 to 223.255.255.255
- Class D 224.0.0.0 to 239.255.255.255 (Reserved for Multicasting Groups)
- Class E 240.0.0.0 to 255.255.255.255 (Reserved for Future Use)
IPv6 Version
IPv6 Internet Protocol का Latest Version है। IPv6 को Internet Engineering Task Force
(IETF) द्वारा विकसित किया
गया था। IPv6 को IPv4
की जगह Use किया जाता है। IPv6
128 Bit Address का उपयोग करता है।
IPv6 Address को 4 Hexadecimal Digits के 8 Groups द्वारा
Represent किया जाता है, जिन समूहों को Colons के द्वारा Support किया जाता है।
tSls& 2001: 0db8: 0000: 0042: 0000: 8a2e: 0370: 7334
ISP and Role of ISP
ISP का पूरा नाम Internet Service Provider है। Internet Service
Provider एक Company है, जो Customers या Users को Internet
Service Provide करती है। ISP को तीन भागों में Divide किया गया है- Tier1,
Tier2 और Tier3
Tier1
Tier1 High Level Internet Service Provider हैं, क्योंकि ज्यादातर Network Lines Tier1 द्वारा ही स्थापित की जाती हैं। ये न
सिर्फ क्षेत्रीय Level पर Network Lines स्थापित करते हैं बल्कि दूसरे देश में Internet Connection
Provide करने के लिए समुद्र
के नीचे Internet Cable बिछाते
हैं। Tier1 ISP World Wide Web के सभी
Corners को जोड़ते हैं। Tier1 Internet Service Provider सीधे लोगों (End
User) को Internet
Connection Provide नही करती हैं] बल्कि ये उसे Tier2को बेचती
हैं।
Tier2
Tier2 ISP एक
Service Provider है, जो Tier1 और Tier3 Internet Service Provider के बीच Connect होता है। Tier2
Provider Peering (पीयरिंग) Agreements के माध्यम से Internet
Traffic को Exchange करते हैं, साथ ही Internet तक पहुँचने के लिए Tier3
ISP से Charges लेते हैं।
Tier3
Tier3 ISP Last Internet Service Provider है, जो Tier2 ISP से Internet की Facility लेकर Users तक पहुँचाने का काम करते हैं।
Role of ISP
ISP एक माध्यम है जो Internet से जुड़ने के लिए Service Provide करता है। और जो Customers को पास वाले Internet
Gateway से Connect करता है। ISP अपने Customers को Internet से Connect करने के लिए एक Modem Provide करता है। ISP World Wide Web (WWW) के Users के लिए Information Service को जोड़ता है। यह Users को Electronic
Mail (E-mail) की Services को Use करने की Permission देता है। ISP अपने Customers के लिए Antivirus
System Applicable (लागू)
करके virus के प्रसार से Security Provide करता ISP Customer के लिए Web Hosting, E-mail Service,
Domain Name का Management भी करता है।
Internet Protocol
Protocol एक तरह के Set of Rules है, जो Digital Communication में Use किए जाते हैं। Protocol के द्वारा ही यह Decide होता है, कि Computer
Network पर Data कैसे Transmit होगा और कैसे Receive होगा। Computing में Protocol को Digital
Language भी कहा जाता है।
इनके बिना हम Internet पर एक दूसरे से संवाद (Conversation) नही कर सकते और ना ही Data को एक Computer से दूसरे
Computer तक Transfer कर सकते हैं। Internet पर हमारे द्वारा भेजी गई कोई File अथवा Mail
Internet Protocol के अनुसार Work करते हैं।
Types of Protocol
विभिन्न
प्रकार के Network Operating System Computer के बीच Communication Process को Control करने के लिए कई प्रकार के Protocols का Use होता है-
Transmission Control Protocol (TCP)
Transmission Control Protocol Digital Network Communication में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले Protocol में से एक है, और Internet Protocol का हिस्सा है, जिसे TCP / IP के रूप में जाना जाता है। TCP एक Connection
Oriented Communication Protocol है। यह मुख्य रूप से अलग-अलग Nodes के बीच Data की End to End Delivery सुनिश्चित करता है। TCP
Internet Protocol के साथ
मिलकर काम करता है।
Internet Protocol (IP)
Internet
Protocol नियमों का एक समूह
है, जिसके द्वारा Internet पर Information को एक Computer से दूसरे Computer तक पहुँचाया जाता है। दूसरे शब्दो
में कहें तो Internet Protocol वह Protocol है, जिसके द्वारा
Data Packets की Routing तथा Addressing की जाती है, ताकि वह Data Packets Network में Travel कर सकें और अपने गंतव्य (Destination)
तक पहुँच सके।
HTTP
HTTP का पूरा
नाम Hyper Text Transfer Protocol (हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) है। यह एक प्रोटोकॉल है जिसका उपयोग
वर्ल्ड वाइड वेब (www) यानी कि
इन्टरनेट में डेटा को एक्सेस करने के लिए किया जाता है। यह प्रोटोकॉल डेटा को प्लेन
टेक्स्ट, हाइपरटेक्स्ट,
ऑडियो, वीडियो आदि के रूप में ट्रांसफर करता है। यह FTP
के समान होता है क्योंकि यह फ़ाइलों को
एक होस्ट से दूसरे होस्ट में ट्रांसफर करता है। और FTP भी यही काम करता है। HTTP Port 80 पर काम करता है।
HTTPS
इसका पूरा
नाम (Hyper Text Transfer Protocol Secure) होता है। यह HTTP का एक Encrypted Version है जिसका इस्तेमाल ज्यादतर ऑनलाइन शॉपिंग
और बैंकिंग को सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जाता है। HTTPS का इस्तेमाल वेबसाइट को सुरक्षित करने
के लिए किया जाता है जिससे कि कोई भी Hacker वेबसाइट को हैक नहीं कर पाता और यूजर का डेटा चोरी
नहीं कर पाता. इस प्रोटोकॉल का उपयोग करके हम ब्राउज़र से किसी भी वेबसाइट के साथ संचार
(Communication) कर सकते
है। यह एक सुरक्षित प्रोटोकॉल है जिसमे ब्राउज़र तथा वेबसाइट के बिच जितना भी कम्युनिकेशन
होता है वह Encrypted होता है।
HTTPS Port 443 पर काम करता है।
FTP
FTP का पूरा
नाम फ़ाइल ट्रान्सफर प्रोटोकॉल (File Transfer Protocol) होता है। यह एक एप्लीकेशन लेयर प्रोटोकॉल है इसका का उपयोग
Internet पर File Transfer (Upload and Download) करने के लिए किया जाता है। File Transfer करने का यह तरीका HTTP का उपयोग करने से अधिक Fast है। FTP Port 21
पर काम करता है।
Post Office Protocol (POP3)
POP3 एक Client / Server Protocol है, जिसका कार्य Internet पर उपलब्ध Mail
Server में से Mail को Download कर Client के Mail
Software तक पहुँचाना होता
है। जब भी हमें कोई Email आता है, तो सबसे
पहले वह Email Internet पर उपलब्ध
हमारे Email Server पर पहुँचता
है। जिसके बाद POP3 Protocol Email Server के साथ Link करके उस Email को Download कर लेता है, और Client के Email
Software तक उसे पहुँचा देता
है। POP3 TCP Port 110 पर E-mail
Massages को Transfer करता है।
Simple Mail Transfer Protocol (SMTP)
Simple Mail Transfer Protocol का उपयोग Mail को Send करने के लिए किया जाता है। SMTP Port
25 पर काम करता है।
User Datagram Protocol (UDP)
UDP एक Connection Free Protocol है। UDP यह देखने के लिए Check नही करता है कि भेजे गए Segment एक Destination (गंतव्य) द्वारा Receive किए गए थे या नही।
Point to Point Protocol (PPP)
Point-to-Point Protocol एक Data Link Layer Communication
Protocol है,
जिसका उपयोग दो Nodes के बीच सीधा सम्बन्ध स्थापित करने के
लिए किया जाता है।
Telnet
Telnet का पूरा
नाम Terminal Network (टर्मिनल
नेटवर्क) है जो लोकल कंप्यूटर को अन्य कंप्यूटर के साथ कनेक्ट करने में मदद करता है।
टेलनेट क्लाइंट/सर्वर सिद्धांत (Client/Server Principle) पर काम करता है। इस प्रोटोकॉल का उपयोग
ज्यादतर क्लाइंट प्रोग्राम और रिमोट कंप्यूटर के द्वारा किया जाता है। यह Port 23 पर काम करता है।
IP Address क्यों आवश्यक है?
IP Address के
बिना नेटवर्क पर किसी भी डिवाइस की पहचान नहीं की जा सकती।
इसके मुख्य कारण हैं:
- प्रत्येक डिवाइस की यूनिक पहचान
- इंटरनेट पर डेटा भेजना और प्राप्त करना
- वेबसाइट तक पहुँच बनाना
- कंप्यूटरों के बीच संचार
- नेटवर्क मैनेजमेंट को आसान बनाना
- ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग
- IP Address के उपयोग
- इंटरनेट एक्सेस
- वेबसाइट होस्टिंग
- ईमेल भेजना
- वीडियो कॉल
- ऑनलाइन गेमिंग
- CCTV Monitoring
- Cloud Computing
- Remote Desktop
- VPN Connection
- Network Administration
IP Address के फायदे
- यूनिक पहचान
- तेज संचार
- आसान नेटवर्क मैनेजमेंट
- सुरक्षित डेटा ट्रांसफर
- इंटरनेट एक्सेस
- विभिन्न नेटवर्क को जोड़ना
- IP Address की सीमाएँ
- IPv4 Addresses सीमित हैं।
- Public IP से Privacy का जोखिम हो सकता है।
- Dynamic IP बदलता रहता है।
- गलत Configuration से Network समस्या हो सकती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
IP Address किसी भी कंप्यूटर नेटवर्क और इंटरनेट का मूल आधार है। यह प्रत्येक डिवाइस को एक विशिष्ट पहचान देता है और डेटा को सही स्थान तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। IPv4 और IPv6 दोनों का अपना महत्व है, लेकिन भविष्य में IPv6 का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। यदि आप कंप्यूटर नेटवर्किंग सीख रहे हैं, तो IP Address की अवधारणा को अच्छी तरह समझना बेहद आवश्यक है।
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